December ki thand mein rapido biker ke saath Sex Hindi sex stories – एक रॉमांटिक और बेहद गरम कहानी
मेरा नाम नेहा है। उम्र 38 साल, शादीशुदा, दो प्यारे बच्चे। पति अच्छे हैं, लेकिन काम की वजह से ज्यादातर थके-मांदे रहते हैं। हमारा सेक्स हफ्ते में 2-3 बार होता है – ठीक-ठाक, लेकिन वो आग जो कभी जवान थी, अब धीमी पड़ चुकी है। फिर भी मैं खुद को फिट रखती हूँ। जिम जाती हूँ, स्किन ग्लो करती है, और अंदर से एक ऐसी प्यास है जो कभी-कभी बेकाबू हो जाती है।

मैं ऑफिस से घर मेट्रो या रैपिडो से आती-जाती हूँ। दिसंबर की वो ठंडी शाम याद है – हवा इतनी तेज़ कि हड्डियाँ कंपकंपा रही थीं। ऑफिस में दिनभर काम के साथ-साथ मैंने कुछ हॉट सेक्स स्टोरीज पढ़ ली थीं। मन में आग लग गई थी, चूत गीली हो रही थी, लेकिन टाइम नहीं मिला खुद को छूने का। जल्दी से रैपिडो बुक किया और बाहर निकली।
ऐप में नाम आया – अर्जुन। 28-30 साल का लग रहा था। बाइक पर बैठा था, ब्लैक जैकेट, हेलमेट उतारे हुए। लंबा, चौड़ी छाती, हाथों में वो बाइक चलाने वाली मजबूत पकड़। मैंने हेलमेट नहीं पहना, बोली – “भाई, ठंड बहुत है, हेलमेट मत पहनाओ प्लीज।” वो मुस्कुराया, “कोई बात नहीं मैम, आप आराम से बैठ जाओ।”
मैं पीछे बैठी। उसकी कमर पकड़ने के बहाने हाथ उसकी जैकेट पर रख दिए। बाइक चली तो ठंडी हवा चेहरे पर लग रही थी, लेकिन उसके शरीर की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। थोड़ी दूर गईं कि अचानक बारिश शुरू हो गई – तेज़, ओले वाली। हम दोनों भीगने लगे। अर्जुन ने बाइक रोकी, बोला – “मैम, ये बारिश रुकने वाली नहीं। आगे एक पुराना शेड है, वहाँ रुक जाएँ? कपड़े सूख जाएँगे।”
मैंने हाँ कर दी। दिल धड़क रहा था – डर भी, और एक अजीब सा रोमांच भी। वो बाइक एक सुनसान, जर्जर पुराने मकान के पीछे ले गया। शेड था, अंदर कमरा – पुराना, लेकिन सूखा। उसने बाइक खड़ी की और बोला – “अंदर चलिए, ठंड कम लगेगी।”
December ki thand mein rapido biker ke saath Sex Hindi sex stories
अंदर गए। अंधेरा था, उसने फोन की टॉर्च जलाई। कुछ पुरानी बोरियाँ पड़ी थीं। उसने लकड़ियाँ जुटाईं, छोटी-सी आग जलाई। कमरा धीरे-धीरे गर्म होने लगा। हम दोनों भीग चुके थे। उसने अपनी जैकेट उतारी, फिर शर्ट। बदन फिट, छाती पर हल्के बाल, पेट पर वो लकीरें जो जिम करने वालों की होती हैं। वो बोला – “मैम, आप भी गीले हो। सलवार उतार लो, सूख जाएगी।”
पहले तो झिझक हुई, लेकिन ठंड से काँप रही थी। मैंने सलवार उतारी, सिर्फ टाइट टॉप और नेट की पैंटी में थी। वो मेरी तरफ देख रहा था – आँखों में भूख, लेकिन प्यार भरी नजर। उसने अपना पैंट उतारा, अंडरवियर में था। उसका लंड पहले से ही सख्त हो रहा था – मोटा, लंबा, जैकेट के नीचे छिपा हुआ था।
वो मेरे पास आया, बोला – “पास बैठ जाओ, ठंड कम लगेगी।” मैं उसके बगल में बैठ गई। उसकी नंगी जाँघ मेरी जाँघ से सटी। उसने धीरे से मेरी कमर पर हाथ रखा। मैंने विरोध नहीं किया। उसका हाथ धीरे-धीरे ऊपर चढ़ा, मेरे टॉप के नीचे। मेरी बूब्स पर हाथ फेरा – निप्पल्स पहले से खड़े थे। वो फुसफुसाया – “नेहा जी… आप कितनी खूबसूरत हो… आज की बारिश ने आपको और भी हॉट बना दिया।”
मैं शरमा गई, लेकिन मन कह रहा था – बस होने दो। उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्का किस, फिर गहरा। जीभ अंदर डाली, मैंने भी साथ दिया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे – जैसे सालों से प्यार था। उसने मेरी ब्रा के हुक खोले, बूब्स बाहर आए। मोटे, भरे हुए। उसने निप्पल मुँह में लिया, चूसने लगा – धीरे-धीरे, फिर जोर से। मैं सिसकार रही थी – “आह्ह… अर्जुन… और चूसो…”
उसने मुझे बोरियों पर लिटाया। मेरी पैंटी उतारी। चूत गीली थी, चमक रही थी। उसने जीभ रखी – पहले होंठ चाटे, फिर क्लिट पर जीभ घुमाई। मैं पागल हो गई – “उफ्फ… अर्जुन… कितना अच्छा लग रहा है… मत रुको…” वो जीभ अंदर तक घुसा रहा था, चूस रहा था। मैं दो बार झड़ गई – पानी बह रहा था।
फिर मैंने उसका अंडरवियर उतारा। लंड बाहर आया – 7-8 इंच का, मोटा, सुपारा लाल। मैंने हाथ में पकड़ा, सहलाया। फिर मुँह में लिया – चूसने लगी। वो कराह रहा था – “नेहा… तुम्हारा मुँह कितना गरम है… चूसो और जोर से…”
हम 69 में थे – वो मेरी चूत चाट रहा था, मैं उसका लंड चूस रही थी। फिर वो ऊपर आया। लंड मेरी चूत पर रखा। धीरे से अंदर किया। मैं चीखी – “आह्ह… धीरे… बड़ा है तेरा…” लेकिन वो धीरे-धीरे पूरा अंदर कर गया। फिर ठोकना शुरू – फच्च-फच्च की आवाजें। आग की रोशनी में हम दोनों पसीने से तर-बतर।
मैंने कहा – “अर्जुन… जोर से चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… आज तुम्हारी हूँ…” वो और तेज़ हुआ। मेरी टाँगें उसके कंधों पर। पूरी स्पीड से धक्के। मैं फिर झड़ी। वो बोला – “नेहा… मैं भी आने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?” मैंने उसकी कमर पकड़ी – “अंदर… मेरी चूत में ही झाड़ दो… अपना सारा माल दे दो…”
उसने जोर के झटके दिए और गरम-गरम वीर्य मेरी चूत में भर दिया। मैं महसूस कर रही थी – वो धड़क रहा था अंदर। हम दोनों एक-दूसरे पर लेट गए। वो मेरे होंठ चूम रहा था, मैं उसकी पीठ सहला रही थी। जैसे प्यार हो गया हो अचानक।
बारिश थम गई। हमने कपड़े पहने। वो मुझे घर छोड़ने आया। जाते वक्त मैंने पैसे दिए, लेकिन उसने मना कर दिया। बोला – “नेहा जी… आज की शाम पैसे से ज्यादा कीमती है। मैंने जो माँगा था, वो पैसे नहीं… तुम्हारी वो मुस्कान, वो गर्माहट… वो मिल गया।”
मैंने उसे आखिरी बार किस किया और घर चली गई। लेकिन वो रात… वो ठंड… वो बारिश… और वो अर्जुन का स्पर्श – आज भी याद आता है तो चूत गीली हो जाती है।
December ki thand mein rapido biker ke saath Sex Hindi sex stories – और मुझे वो “कुछ और” देने में कितना मजा आया, वो सिर्फ मैं और वो जानते हैं।
कैसी लगी ये हॉट और रोमांटिक वाली कहानी? कमेंट में बताना जरूर!
Read More Chudai Story Hindi Me
Chudai Story Hindi Me – पड़ोस की भाभी की प्यास बुझाई