Komal and Ravikant Romantic Hindi Sex Stories मेरा नाम कोमल है। मेरी उम्र 26 साल है, और मैं एक छोटे से शहर में रहती हूँ। मेरी जिंदगी हमेशा से बहुत साधारण रही है—घर, ऑफिस, और फिर घर। लेकिन अंदर से मैं हमेशा कुछ अलग, कुछ खतरनाक, कुछ ऐसा चाहती थी जो मुझे मेरी इस बोरिंग जिंदगी से बाहर निकाले। मेरी त्वचा गोरी है, मेरे बाल लंबे और काले हैं,
जो मेरी कमर तक लहराते हैं। मेरी आँखें बड़ी-बड़ी हैं, और लोग कहते हैं कि मेरी मुस्कान में एक अजीब सी कशिश है। मेरे बदन की बनावट ऐसी है कि जब मैं चलती हूँ, तो लोग पलटकर देखते हैं—मेरी चूचियाँ भरी हुई हैं, गोल और सख्त, जो मेरे टाइट कुर्ते में साफ झलकती हैं।
मेरी कमर पतली है, और मेरे कूल्हे चौड़े, जो मेरी जींस में हर कदम पर हिलते हैं। लेकिन ये सब मैं खुद नहीं कह रही, ये तो वो नजरें कहती हैं जो मुझ पर टिकी रहती हैं।**
उस दिन मैं ऑफिस से घर लौट रही थी। शाम हो चुकी थी, और सड़क पर हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। मैंने एक टाइट सफेद कुर्ता पहना था, जिसके नीचे मेरी काली ब्रा की स्ट्रैप्स हल्की-हल्की दिख रही थीं।
मेरे साथ मेरा एक सहकर्मी, रविकांत, भी था। रविकांत एक लंबा-तगड़ा मर्द था, उसकी उम्र करीब 32 साल होगी। उसकी मूंछें घनी थीं, और उसकी आँखों में हमेशा एक अजीब सी चमक रहती थी।
वो मुझसे अक्सर हँसी-मजाक करता था, लेकिन आज उसकी बातों में कुछ अलग सा लहजा था। हम एक सुनसान रास्ते से गुजर रहे थे, जहाँ दूर-दूर तक कोई नहीं था। उसने अचानक मेरी ओर देखा और कहा,
“कोमल, तुम्हें पता है, तुम्हारी मुस्कान में कुछ तो बात है। मैं हर बार खो सा जाता हूँ।”**मैंने हँसते हुए कहा, “अच्छा जी, अब ये नई बात कहाँ से आई?” लेकिन मेरे अंदर एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी।
उसकी आवाज में कुछ ऐसा था जो मेरे बदन में सिहरन पैदा कर रहा था। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा, “सच कहूँ, मैं तुम्हें देखता हूँ तो बस… कुछ और सोचना बंद हो जाता है।”
उसका हाथ मेरे कंधे से हल्का सा नीचे सरका, और मैंने महसूस किया कि मेरी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उसकी ओर देखा, उसकी आँखों में एक भूख थी, एक ऐसी भूख जो मुझे डराने के साथ-साथ उत्साहित भी कर रही थी।**
हम एक छोटी सी गली में रुक गए। वहाँ एक पुराना सा घर था, जिसके दरवाजे बंद थे, लेकिन खिड़कियाँ खुली हुई थीं। रविकांत ने मेरी ओर देखा और कहा, “यहाँ कोई नहीं आता, कोमल। बस थोड़ी देर रुकते हैं।” मैं जानती थी कि ये गलत है, लेकिन मेरे अंदर की वो छुपी हुई कोमल, जो हमेशा कुछ खतरनाक चाहती थी, वो जाग रही थी।
मैंने हल्का सा सिर हिलाया, और वो मुझे उस घर के अंदर ले गया। अंदर अंधेरा था, लेकिन हल्की सी रौशनी खिड़की से आ रही थी। उसने दरवाजा बंद किया, और मैंने महसूस किया कि मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा है।**उसने मेरे पास आकर मेरे गाल पर हाथ रखा। उसकी उँगलियाँ गर्म थीं, और उसकी साँसें मेरे चेहरे पर टकरा रही थीं।
“कोमल, मैं तुम्हें छूना चाहता हूँ। बहुत दिनों से ये ख्वाहिश है,” उसने धीमी आवाज में कहा। मैं कुछ बोल नहीं पाई, बस उसकी आँखों में देखती रही। उसने मेरे कुर्ते के ऊपर से मेरी चूचियों को हल्का सा दबाया, और मैंने एक हल्की सी सिसकारी ले ली,
“आह्ह…” मेरे मुँह से निकला। उसकी उँगलियाँ मेरे निप्पल्स को ढूँढ रही थीं, जो अब सख्त हो चुके थे और मेरे कुर्ते के ऊपर से साफ दिख रहे थे। उसने मेरे कुर्ते को ऊपर उठाया, और मेरी काली ब्रा को देखकर उसकी आँखें चमक उठीं। “क्या माल है तू, कोमल। तेरी चूचियाँ तो बिल्कुल दूध की थैलियाँ हैं,” उसने गंदी सी हँसी के साथ कहा।**
मैं शर्मा रही थी, लेकिन मेरे अंदर की गर्मी बढ़ रही थी। उसने मेरी ब्रा को नीचे खींचा, और मेरी चूचियाँ आजाद हो गईं। मेरे निप्पल्स गुलाबी थे, और ठंडी हवा से वो और सख्त हो गए। उसने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा, “म्म्म्ह्ह… कितना स्वाद है,” उसने कहा, और उसकी जीभ मेरे निप्पल के चारों ओर घूम रही थी।
मैंने उसका सिर पकड़ लिया और अपनी ओर खींचा, “आह्ह… रवि, धीरे… आह्ह-हा!” मेरी सिसकारियाँ गूंज रही थीं। उसकी जीभ से निकल रही गरम सलाइवा मेरी चूची पर फैल रही थी, और उसकी दूसरी उँगलियाँ मेरी दूसरी चूची को मसल रही थीं। मैं पागल हो रही थी, मेरी चूत में एक अजीब सी मचलन हो रही थी, जैसे वो कुछ माँग रही हो।**
उसने मेरे कुर्ते को पूरा ऊपर कर दिया, और मेरी जींस के बटन खोलने लगा। मैंने उसे रोका नहीं, बस उसकी हरकतों को महसूस कर रही थी। उसने मेरी जींस नीचे खींची, और मेरी काली पैंटी को देखकर उसने एक गहरी साँस ली। “तेरी चूत की खुशबू तो मुझे अभी से पागल कर रही है,”
उसने कहा, और उसकी उँगलियाँ मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहलाने लगीं। मैंने महसूस किया कि मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी, और उसकी उँगलियाँ उस गीलापन को रगड़ रही थीं। “आह्ह… रवि, प्लीज… आह्ह-हा!” मैं बेकाबू हो रही थी। उसने मेरी पैंटी को नीचे खींचा, और मेरी चूत को देखकर उसकी साँसें तेज हो गईं।
मेरी चूत गुलाबी थी, हल्के से बाल थे, और वो गीली होकर चमक रही थी। उसने एक उंगली मेरी चूत में डाली, और मैं चीख पड़ी, “आह्हनंग्ह… रवि, धीरे… आह्ह!”**उसकी उंगली अंदर-बाहर हो रही थी, और मैं अपनी टाँगें काँपते हुए महसूस कर रही थी। उसने दूसरी उंगली भी डाल दी, और मेरी चूत को फैलाते हुए वो मुझे चोदने लगा।
“तेरी चूत कितनी टाइट है, कोमल। मेरा लंड तो अभी से तड़प रहा है,” उसने कहा, और उसकी उँगलियाँ मेरे अंदर तेजी से चल रही थीं। मैं अपनी आँखें बंद कर चुकी थी, बस उसकी हरकतों को महसूस कर रही थी। मेरी चूत से पानी निकल रहा था, और उसकी उँगलियाँ उस गीलेपन से चिपचिपी हो गई थीं।
उसने अपनी उँगलियाँ निकालीं और उन्हें चाट लिया, “म्म्म्ह्ह… तेरी चूत का स्वाद तो नमकीन है, बिल्कुल मेरा मनपसंद,” उसने गंदी सी मुस्कान के साथ कहा।**मैं अब बेकाबू थी। मैंने उसकी शर्ट के बटन खोले, और उसका सीना देखा। उसका सीना चौड़ा था, और हल्के से बाल थे। मैंने उसके पैंट की ओर देखा,
जहाँ उसका लंड साफ तना हुआ दिख रहा था। मैंने हल्का सा शर्माते हुए उसकी पैंट खोली, और उसका लंड बाहर आ गया। वो मोटा और लंबा था, करीब 7 इंच का, और उसकी टिप से प्री-कम टपक रहा था। मैंने उसे हाथ में लिया, और उसकी गर्मी को महसूस किया। “ये कितना सख्त है, रवि,” मैंने कहा, और मेरी उँगलियाँ उसकी टिप पर घूम रही थीं।
उसने एक गहरी साँस ली और कहा, “कोमल, इसे मुँह में लो। मैं तुम्हारे होंठों को इसके चारों ओर देखना चाहता हूँ।”**मैंने उसकी ओर देखा, और फिर नीचे झुक गई। उसका लंड मेरे मुँह के पास था, और उसकी गंध मुझे पागल कर रही थी—एक अजीब सी मर्दाना गंध, थोड़ी पसीने की, थोड़ी नमकीन।
मैंने अपनी जीभ निकाली और उसकी टिप को चाटा, “म्म्म्ह्ह…” उसने एक सिसकारी ली। मैंने धीरे-धीरे उसे मुँह में लिया, और उसका स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। “आह्ह… कोमल, हाँ… ऐसे ही चूसो… आह्ह-हा!” वो मेरे सिर को पकड़कर धीरे-धीरे मुझे गाइड कर रहा था। मैंने उसका लंड गहराई तक लिया, और मेरे होंठ उसके चारों ओर टाइट हो गए।
मेरी सलाइवा उसके लंड पर फैल रही थी, और वो गीला होकर चमक रहा था। मैंने तेजी से चूसना शुरू किया, और उसकी सिसकारियाँ तेज हो गईं, “आह्हनंग्ह… कोमल, तू तो रंडी जैसी चूस रही है… आह्ह!”**कुछ मिनट बाद उसने मुझे उठाया और दीवार के सहारे खड़ा कर दिया।
उसने मेरी एक टाँग उठाई और मेरी चूत के पास अपना लंड रखा। “अब मैं तेरी चूत को फाड़ दूँगा, कोमल। तैयार हो?” उसने पूछा, और मैंने बस सिर हिलाया। उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला, और मैं चीख पड़ी, “आह्हनंग्ह… रवि, धीरे… ये बहुत मोटा है… आह्ह!” उसने हल्का सा जोर लगाया,
और उसका लंड मेरी चूत को फैलाते हुए अंदर जा रहा था। मैं दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी। उसकी हरकतें तेज हो गईं, और वो मुझे जोर-जोर से चोदने लगा। “तेरी चूत कितनी गर्म है, कोमल… मेरा लंड तो पिघल रहा है… आह्ह!” वो बोल रहा था, और उसकी साँसें तेज हो रही थीं।**
मेरी चूचियाँ हर धक्के के साथ उछल रही थीं, और मैं दीवार को पकड़कर खड़ी थी। उसका लंड मेरी चूत को पूरी तरह से भर रहा था, और हर धक्के के साथ एक अजीब सी गीली आवाज आ रही थी—पच-पच-पच। मेरी चूत से पानी निकल रहा था, और उसका लंड उस गीलेपन से चिपचिपा हो गया था। “
आह्ह… रवि, मैं… मैं झड़ने वाली हूँ… आह्ह-हा!” मैं चीख रही थी, और उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। “हाँ, कोमल, झड़ जा… मेरे लंड पर झड़… आह्ह!” उसने कहा, और मैंने महसूस किया कि मेरा बदन काँप रहा है। एक गर्म लहर मेरे अंदर से निकली, और मैं झड़ गई, “आह्हनंग्ह… हाँ… हाँ… आह्ह!” मेरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूंज रही थीं।**
उसने कुछ और धक्के मारे, और फिर कहा, “कोमल, मैं भी आने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?” मैंने हाँफते हुए कहा, “बाहर… प्लीज…” उसने जल्दी से अपना लंड निकाला, और मेरे पेट पर अपना गरम माल गिरा दिया। “आह्ह… हाँ… ये ले… आह्ह!” वो हाँफ रहा था, और उसका माल मेरे पेट पर फैल गया। उसकी गंध तीखी थी, थोड़ी नमकीन,
और मेरे बदन पर गर्मी फैला रही थी। हम दोनों हाँफ रहे थे, और मैंने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में अब भी वो भूख थी, लेकिन साथ में एक अजीब सी तृप्ति भी।**हमने अपने कपड़े ठीक किए, और बाहर निकलने से पहले उसने मुझे गले लगाया। “कोमल, ये बस शुरुआत है। अभी तो बहुत कुछ बाकी है,”

उसने कहा, और मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर अब भी एक मचलन बाकी है। मैं जानती थी कि ये गलत है, लेकिन ये गलत इतना सही क्यों लग रहा था? हम उस सुनसान घर से बाहर निकले, और रात के अंधेरे में घर की ओर चल पड़े। लेकिन मेरे दिमाग में एक सवाल था—क्या ये सब बस आज तक रहेगा, या रविकांत और मैं अब कुछ और बनने वाले हैं?