Chudai Story Hindi Me – पड़ोस की भाभी की प्यास बुझाई हाय दोस्तों, मेरा नाम राहुल है। पटना में रहता हूँ, उम्र 32 साल की हो गई। शादीशुदा हूँ, लेकिन बीवी दिल्ली में जॉब करती है, महीने में 15-20 दिन घर पर नहीं रहती।
Chudai Story Hindi Me पड़ोस की रिया भाभी की प्यास बुझाई
मैं अकेला घर संभालता हूँ, छोटा-सा फ्लैट है, पड़ोस में रहती हैं रिया भाभी। उम्र करीब 34-35 की होगी, लेकिन देखने में 28 की लगती हैं। गोरी, फिगर 36-28-38, और वो तरीका जिससे वो साड़ी पहनती हैं… उफ्फ, कमर की झलक, पीठ का खुला ब्लाउज, और चलते वक्त गाँड की मटक – बस देखते ही लंड खड़ा हो जाता था।
शुरुआत कुछ 8-9 महीने पहले हुई। भाभी का पति सरकारी नौकरी में है, ज्यादातर टूर पर रहता है। भाभी अकेली रहतीं, कभी-कभी मेरे घर आकर चाय पीतीं या कुछ सामान माँगने आ जातीं। मैं भी बहाना बनाकर उनके घर चला जाता। बातें होतीं, हँसी-मजाक होता, लेकिन आँखों में वो चिंगारी दोनों तरफ थी।
एक दिन शाम को बारिश हो रही थी। मैं घर लौटा तो देखा भाभी बालकनी में खड़ी हैं, भीग रही हैं। साड़ी पूरी गीली, ब्लाउज से ब्रा की लाइन साफ दिख रही थी। मैंने आवाज लगाई – “भाभी, अंदर आ जाओ, सर्दी लग जाएगी।”
वो मुस्कुराईं और बोलीं – “राहुल, तुम्हारे घर में ही आ जाऊँ? मेरे घर में लाइट चली गई है, अकेले डर लग रहा है।”
मैंने तुरंत हाँ कर दी। वो आईं, साड़ी से पानी टपक रहा था। मैंने तौलिया दिया, बोला – “भाभी, पहले ये साड़ी बदल लो, मैं बाहर इंतजार करता हूँ।”
वो मेरे बेडरूम में गईं। मैं बाहर खड़ा था, लेकिन मन में तूफान चल रहा था। थोड़ी देर बाद वो बाहर आईं – मेरी एक पुरानी टी-शर्ट और ट्रैक पैंट पहनकर। टी-शर्ट टाइट थी, बूब्स के आकार साफ उभरे हुए थे। निप्पल्स खड़े थे, क्योंकि ठंड लग रही थी। वो शरमाईं और बोलीं – “सॉरी राहुल, तुम्हारे कपड़े पहन लिए… लेकिन क्या करूँ, मेरे पास कुछ सूखा नहीं था।”
मैंने कहा – “कोई बात नहीं भाभी, आप आराम से बैठो। चाय बनाता हूँ।”
चाय बनाई, साथ बैठे। बातों-बातों में वो बोलीं – “राहुल, तुम्हारी बीवी कितनी लकी है… तुम इतने केयरिंग हो। मेरा पति तो बस काम-काम करता रहता है। घर आता है तो थका-हारा, सो जाता है। मैं… मैं सालों से अकेली हूँ।”
उनकी आँखें नम हो गईं। मैंने उनका हाथ पकड़ा – “भाभी, आप अकेली नहीं हैं। मैं हूँ ना आपके लिए।”
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं। फिर धीरे से मेरे कंधे पर सिर रख दिया। मैंने उनका गाल सहलाया। वो काँप रही थीं। मैंने उनका चेहरा ऊपर किया और होंठों पर होंठ रख दिए। पहले हल्का किस, फिर गहरा। वो भी साथ देने लगीं। जीभ अंदर डाली, वो मेरी जीभ चूसने लगीं।
हम बेड पर लेट गए। मैंने उनकी टी-शर्ट ऊपर की। बिना ब्रा के बूब्स बाहर आए – मोटे, गोरे, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मैंने एक बूब मुँह में लिया, चूसने लगा। वो सिसकार रही थीं – “आह्ह… राहुल… कितने दिन हो गए… जोर से चूसो…”
दूसरा बूब दबाते हुए मैंने नीचे हाथ किया। ट्रैक पैंट के अंदर हाथ डाला – पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी साइड की और उँगली अंदर डाली। वो चीखी – “उफ्फ… अंदर… और अंदर…”
मैंने पैंट उतारी, उनकी चूत देखी – क्लीन शेव, गुलाबी, पानी से चमक रही थी। मैंने जीभ रखी। पहले होंठ चाटे, फिर क्लिट पर जीभ घुमाई। वो पागल हो गईं – “राहुल… चाटो… जोर से… मैं झड़ जाऊँगी… आह्ह…”
10 मिनट तक चाटता रहा। वो दो बार झड़ गईं, मेरा मुँह उनका पानी से भर गया।
फिर वो उठीं, मेरी पैंट उतारी। मेरा लंड 7 इंच का खड़ा था, सुपारा लाल। वो उसे पकड़कर बोलीं – “कितना मोटा है… कितने दिन से तरस रही थी ऐसी चीज के लिए।”
वो मुँह में लेकर चूसने लगीं। गहराई तक लेतीं, जीभ घुमातीं। मैं कराह रहा था – “भाभी… कमाल कर रही हो… और चूसो…”
फिर मैंने उन्हें लिटाया। टाँगें फैलाईं, लंड चूत पर रखा। धीरे से अंदर किया। वो टाइट थीं, लेकिन गीली होने से आसानी से गया। पूरा अंदर गया तो वो चीखी – “आह्ह… फाड़ दो मेरी चूत… जोर से चोदो राहुल…”
मैंने स्पीड बढ़ाई। फच्च-फच्च की आवाजें आने लगीं। उनके बूब्स उछल रहे थे। मैंने एक बूब चूसते हुए ठोकता रहा। वो बार-बार झड़ रही थीं – “बस… और तेज… मैं फिर झड़ रही हूँ…”
फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में किया। गाँड ऊपर, मैं पीछे से ठोक रहा था। उनकी गाँड इतनी मुलायम थी, थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था। वो कराह रही थीं – “हाँ… गाँड पकड़ो… जोर से… अपनी भाभी को चोदो…”
करीब 40 मिनट चुदाई चली। मैं चरम पर पहुँचा तो बोला – “भाभी… निकलने वाला है…”
वो बोलीं – “अंदर… मेरी चूत में ही झाड़ दो… अपना सारा माल दे दो…”
मैंने जोर के झटके दिए और गरम वीर्य उनकी चूत में भर दिया। वो भी उसी वक्त झड़ गईं। हम दोनों थककर लेट गए। मैंने उन्हें किस किया, वो मेरी छाती पर सिर रखकर बोलीं – “राहुल… आज तुमने मेरी सालों की प्यास बुझा दी। अब से जब भी बीवी नहीं होगी, मैं तुम्हारे पास आऊँगी।”
उस रात हम तीन बार और चुदाई की। सुबह वो अपने घर चली गईं, लेकिन शाम को फिर आ गईं। अब तो हफ्ते में 4-5 दिन हम साथ होते हैं। कभी किचन में, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में। भाभी की प्यास कभी कम नहीं होती।
दोस्तों, ये मेरी सच्ची कहानी है। पड़ोस की भाभी की प्यास बुझाने का मजा ही अलग है। अगर तुम्हारे आसपास भी कोई ऐसी भाभी है, तो थोड़ा इशारा करो – शायद वो भी तरस रही हो।

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